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धनतेरस का महत्त्व

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022

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परिचय (धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022)

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022
परिचय / धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022। धनतेरस स्वास्थ्य, धन और समृद्धि के महत्त्व का प्रतीक हैं। धनतेरस का अर्थ-धन की तेरस, मतलब अपने धन को तेरह गुढ़ा बढ़ाने का और उसमें वृद्धि करने वाला दिन। भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही स्वास्थ्य का स्थान सबसे ऊपर माना जाता हैं।

इसीलिए ठीक कहा गया हैं-पहला सुख निरोगी काया दूजा सुख घर में। इसीलिए दीपावली जैसे बड़े त्यौंहार में पहला महत्त्व धनतेरस को दिया जाता हैं । यह भारतीय संस्कृति के बिलकुल अनुकूल हैं। धनतेरस दिवाली के पहले दिन के उत्सव का एक हिस्सा है, जिसे भारत में सबसे पवित्र और बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

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धनतेरस को “धनत्रयोदशी” भी कहा जाता हैं और इसी तिथि दिन भगवान धनवंतरि समुंद्र-मंथन के वक्त अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थें। महावीर स्वामी जी इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिए योग निरोध के लिए चले गए और दीपावली के दिन उनको निर्वाण प्राप्त हुआ। इसीलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता हैं ।

यह हिंदू कैलेंडर के कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता हैं। धनतेरस के अवसर पर ‘धनवंतरि’ की पूजा की जाती हैं जो की “आयुर्वेद” (स्वास्थ्य की समग्र प्रणाली) के भगवान माने जाते हैं जिन्होंने मानव जाति की भलाई के लिए और रोग की पीड़ा से छुटकारा दिलाने के लिए आयुर्वेद बनाया हैं और इसका ज्ञान प्रदान किया ।

भारतीय आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी मंत्रालय ने धनतेरस को “राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस” के रूप में मानाने का निर्णय ले लिया हैं। इस दिन सभी लोग घर के बहार मृत्यु के देवता के लिए दीपक जलाते हैं ताकि परिवार के किसी भी सदस्य की असमय मृत्यु से बचा जा सके।
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धनतेरस का महत्त्व (धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022)

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022
धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022। जैसा की आपने सुना की हाथ में अमृत का कलश लेकर भगवान धनवंतरि प्रकट हुए थेंI उनके द्वारा कलश लेकर प्रकट होने की वजह से ही धनतेरस पर नयें बर्तन खरीदने की परम्परा बनी हैं।

यह भी कहा जाता हैं कि धनतेरस पर धन खर्च करके वस्तुऍ खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि हो जाती हैं । कुछ लोग धनिया के बीज खरीदकर दीपावली के बाद अपने खेतों में या बगीचों में बोते हैं । धनतेरस, भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में जानने के लिए लगातार पड़ते रहे।

धनतेरस पर शाम को घर के बाहर द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी प्रचलित हैं। इस प्रथा के पीछे एक लोककथा प्रचलित हैं जो इस प्रकार हैं-किसी समय एक हेम नाम के राजा थें । राजा को भगवान् की कृपा से पुत्र की प्राप्ति हुईं थीं ।

पुत्र के जन्म होने के बाद ज्योतिषी को बुलाया गया कुंडली बनाने के लिए तो तब उन्होंने बताया की जिस दिन इस दिन इस बालक का विवाह होगा उसके थीं चार दिन बाद वह मृत्यु को प्राप्त हो जायेगा ।

इस दुःख भरे समाचार को सुनकर राजा गहरी चिंता में पड़ गया और अपने पुत्र को ऐसे स्थान पर भेज दिया जहाँ किसी भी स्त्री की झलक तक नहीं दिख पाएँ । एक दिन एक राजकुमारी देवयोग से गुजरी और दोनों के एक दूसरे पर मोहित हो जाने की वजह से दोनों ने गन्धर्व विवाह कर लिया।

विधि का विधान सामने आते ही विवाह ह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार को लेने आ पहुँचे उसी समय नवविवाहिता राजकुमारी का विलाप सुनकर यमदूत का दिल बेचैन हो गया परन्तु उन्हें मजबूरी में अपना कार्य करना पड़ा ।

यमदूत ने यमराज सारी बात बतायीं तब एक उस समय इक देवता ने विनती की-हे यमराज! आप कोई ऐसा उपाए बताएँ जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाएँ। दूत की इस विनती करने पर यमराज बोले, हे दूत! अकाल मृत्यु तो कर्म की गति हैं।

सुनो मैं तुम्हें इससे मुक्ति पाने का इलाज बताता हूँ । जो व्यक्ति कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मेरी पूजा करके दक्षिण दिशा की और दीपों से बानी माला भेँट करता हैं उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता हैं। इसी कारण से तब से सभी लोग धनतेरस को घर के बहार दीप जलातेँ हैं ।

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022। धनतेरस के दिन लोग चाँदी या उससे बने बर्तन भी खरीदते हैं। इसके पीछे की प्रथा यह हैं कि चाँदी चन्द्रमा का प्रतीक होती हैं जो की शीतलता का प्रतीक होती हैं और इस प्रथा से लोगों के मन में संतोष रुपि धन का वास होता हैं ।

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 । चूँकि संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया हैं । किसके पास संतोष हैं वह स्वस्थ हैं, उसके जीवन में ख़ुशियाँ हैं और वही सबसे धनवान हैं, इसीलिए इस दिन को भगवान धनवंतरि की पूजा करके संतोष रूपि फल की प्राप्ति हर किसी को करनी चाहिए ।

लोग इसी दिन को दीपावली पर लक्ष्मी और गणेश के पूजन के लिए इनकी मूर्ती भी खरीदते हैं । धनतेरस, भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में जानने के लिए लगातार पड़ते रहे।

धनतेरस पर भगवान की पूजा का महत्त्व-जैसा की आप जानते हैं कि धनतेरस के दिन आयुर्वेद को बनाने वाले “भगवान धनवंतरि” की पूजा की जाती हैं, इसीलिए चिकित्सकों के लिए यह दिन विशेष महत्त्व रखता हैं I भगवान धनवंतरि के अलावा इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव की पूजा की जाती हैं ।

इस दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्त्व हैं । सुना गया हैं कि इस दिन जो भी देवी लक्ष्मी जी की पूजा पूरे मन से करता हैं वह सारे संसार के शौक और भय से मुक्ति पता हैं और साथ ही लक्ष्मी जी उस पर अपनी कृपा करके उसे धन-धान्य और अन्य सुविधाओं से परिपूर्ण करके निरोगी और लम्बी आयु प्रदान करती हैं।

इस दिन जो भी भगवान कुबेर की पूजा करता हैं वह सभी राक्षस प्रवर्तियों के संगत के भय से मुक्त रहता हैं। चूँकि कुबेर जी आसुरों से बचाव करने वाले देवता हैं । धनवंतरि और माँ लक्ष्मी दोनों ही समुंद्र-मंथन से अवतरित हुयें थें और दोनों ही कलश के साथ आयें ।
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धनतेरस के दिन क्या करें (धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022)

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धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 । धनतेरस के दिन ताँबे, पीतल और चाँदी के नएँ बर्तन और आभूषण खरीदें जाते हैं । अब लोग बर्तन और आभूषण के अलावा वहन, कंप्यूटर और मोबाइल आदि खरीदना पसंद करते हैं । ज्यादातर लोग सोने और चाँदी के सिक्कें खरीदना शुभ मानते हैं ।

इस दिन दीपावली के पूजन हेतुः लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति खरीदना बहुत ज्यादा शुभ माना जाता हैं । इस दिन लोग खील-बताशें और नयें-नयें वस्त्र भी खरीदते हैं । कुछ लोग साबुत हरा धनियाँ खरीकर उसे पूजा के स्थान पर रख लेते हैं ।

धनतेरस भारत में विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता हैं। ज्यादातर सब लोग सांयकाल अपने घर के बाहर द्वार, आँगन और बगीचों आदि में दीपक जलाकर करते हैं । लोग अपने घर के साथ-साथ अपनी दुकानों, कंपनियों आदि को भी सजाते हैं ।

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 । इस दिन मंदिरों, तालाबों, जलाशयों, गौंशाला, नदी के घाटों आदि को जगमगायाँ जाता हैं । पश्चिम भारत के व्यापारिक-समुदाय के लोगों के लिए तो यह त्योंहर विशेष महत्त्व रखता हैं। महाराष्ट्र में तो सुखें धनियें के बीज को पीसकर उसे गुड़ के साथ मिलकर एक मिश्रण तैयार किया जाता हैं, जिसे “नैवेद्य” कहा जाता हैं ।

ग्रामीण इलाकों के लोग और किसान अपने पशुओं को अच्छे से सजाकर उनकी पूजा करते हैं चूँकि वहाँ के लोग गाँयों को माँ लक्ष्मी के रूप में मानते हैं, उनकी विशेष सम्मान और आदर के साथ उनकी पूजा भी करते हैं।

इस दिन लोग हल जुटी मिट्टी को दूध में भिगोते हैं फिर उसमें सेमर की शाखा लगाते हैं फिर उसे अपने शरीर पर तीन बार फेरकर कुमकुम लगते हैं ।

धनतेरस के दिन फिर से सबकुछ नया किया जाता हैं। धनतेरस, भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में पूरी जानकारी के लिए अंत तक पड़े । धनतेरस, भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में पूरी जानकारी के लिए अंत तक पड़े ।

धनतेरस की कथा (धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022)

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 ।धनतेरस से जुड़ी कथा यह हैं कि असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने कार्तिक पक्ष त्रयोदशी के दिन देवताओं के कार्य में हस्तक्षेप किया जिसका नतीजा यह निकला की क्रोध में आकर भगवन विष्णु जी ने उनकी आँख पर वार किया जिससे उनकी आँख फूट गयी थीं ।

इसके बाद विष्णु जी ने वामन अवतार धारण किया क्योकिं विष्णु जी देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्त करवाना चाहते थें और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुँच गए । वामन रूप धारण करने पर भी शुक्राचार्य ने विष्णु जी को पहॅचान लिया और राजा बलि से वामन के कुछ भी माँगने पर उन्हें मन करने की विनती की ।

उन्होंने राजा बलि के सामने विष्णु का सारा भेद खोल दिया कि वामन और कोईं नहीं साक्षात भगवान विष्णु जी हैं वह देवताओं की मदद करने के लिए आपसे कुछ छीनने आयें हैं । राजा बलि ने शुक्राचार्य की बात मानने से माना कर दिया। भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में जानने के लिए लगातार पड़ते रहे।

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 । वामन भगवान के द्वारा मांगी गई 3 पग भूमि दान के उद्देश्य से कमंडल से जल लेने के बाद संकल्प करने लगे भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में जानने के लिए लगातार पड़ते रहे।

शुक्राचार्य जी ने बलि को दान करने से रोकने के लिए कुछ उपाय सोचा भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में जानने के लिए लगातार पड़ते रहे। उन्होंने बलि के कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश किया जिससे वह कमंडल के जल निकलने का मार्ग बंद कर सके और विष्णु भगवान जी कमंडल में से जल न ले पायें ।

शुक्राचार्य की इस चाल को भगवान विष्णु जी ने समझ लिया और जल लेते समय उन्होंने अपने हाथ में रखे कुशा को कमंडल में ऐसे रखा की शुक्राचार्य जी एक आँख फूँट गई । आँख फूँटने के बाद शुक्राचार्य जी दर्द सहन न करने के कारन कमंडल से बाहर नकल आएँ ।

इस घटना के बाद बलि ने 3 पग भूमि दान करने का संकल्प लिया । भगवान विष्णु ने अपने पैर से सारी पृथ्वी को नाप लिया और अपने दूसरे पैर से अंतरिक्ष को नापा । तीसरे के लिए जगह न होने की वजह से बलि ने अपना सर विष्णु के चरणों में रख दिया और इसी प्रकार राजा बलि ने अपना सब गवा दिया ।

तो इसी प्रकार से देवताओं को भगवान विष्णु जी ने बलि के भय से मुक्ति दिलायी और जो भी धन देवताओं से बलि ने छीना था उनसे कईं गुना अधिक मात्रा में देवताओं को मिल पाया । इसी कथा के उपलक्ष्य में भी धनतेरस त्यौंहार मनाया जाता हैं । धनतेरस, भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 के बारे में पूरी जानकारी के लिए अंत तक पड़े ।

उपसंहार (धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022)

धनतेरस-भारत का उत्सव 8 अक्टूबर 2022 । जैसा की आपने पड़ा कि देवताओं के चिकित्सक, समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जन्मदाता और चिकित्सक के देवता भगवान समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और अमृत को पीकर देवता अमर हो गये थें ।

इसी तरह आज भी धनतेरस के दिन लोग अपने अच्छे स्वास्थय और दीर्घायु की कामना के लिए भगवान धनवंतरि की पूजा करते हैं ।

इन्हीं के द्वारा बतायें गए शारीरिक और मानसिक सम्बन्धी उपाय और इलाज अपनाना ही धनतेरस का मुख्य उद्देश्य हैं इसलिए आज भी धनतेरस के दिन लोग अपने अच्छे स्वास्थय ओर दीर्घायु की कामना के लिए भगवान धनवंतरि की पूजा करते हैं और इसलिए इस त्यौंहार को बढ़ी धूम-धाम के साथ बनाया जाता हैं।
मुझे उम्मीद है कि आपको धनतेरस पर्व के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी।

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